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हर हाथ को काम का वादा निकला झूठ: 2018 में एक करोड़ से ज़्यादा लोगों की छिन गईं नौकरी

भारत की बेरोजगारी दर दिसंबर 2018  में 7.4 प्रतिशत तक बढ़ गई. जो 15 महीनों में उच्चतम बेरोजगारी दर है.

मोदी सरकार में सिर्फ़ एक साल में (2018 में) ही 1 करोड़ 18 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोनी पड़ी है. यह खुलासा सेंटर ऑर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट में किया गया है.

इस बेरोज़गारी का व्यापक असर कमजोर समूहों जैसे महिलाओं, दैनिक-मजदूर श्रमिकों और खेतिहर मजदूरों पर हुआ है. नौकरी गंवाने वालों में 8.8 मिलियन (करीब 80 लाख से ज्यादा) महिलाओं की तुलना में पुरुष केवल 2.2 मिलियन (तकरीबन 20 लाख) है.

बिजनेस टुडे की ख़बर की माने तो एक अनुमान के अनुसार ग्रामीण भारत में लोगों को सबसे ज्यादा नौकरियों 9.1 मिलियन (90 लाख) का नुकसान उठाना पड़ा है. शहरी इलाकों में 1.8 मिलियन (10 लाख) लोगों ने अपनी नौकरियां गंवाई हैं. नौकरियों का नुकसान उठाने में ग्रामीण भारत का 84 प्रतिशत हिस्सा शामिल है.

ग़ौरतलब है कि जहां ग्रामीण पुरुषों और महिलाओं के साथ-साथ शहरी महिलाओं को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, वहीं शहरी पुरुष इससे प्रभावित नहीं हुए हैं. 6.5मिलियन (60 लाख) ग्रामीण महिलाओं ने अपनी नौकरी खो दी, जबकि शहरी महिलाओं का आंकड़ा 2.3 मिलियन (20 लाख) था. वहीं ग्रामीण पुरुषों ने 2.3 मिलियन (20 लाख) नौकरियां गंवाई हैं, लेकिन शहरी पुरुषों ने वास्तव में 5,00,000 नौकरियां प्राप्त कीं हैं.

ज्ञात हो कि भारत की बेरोजगारी दर दिसंबर 2018  में 7.4 प्रतिशत तक बढ़ गई. जो 15 महीनों में उच्चतम बेरोजगारी दर है.

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